रानीपुर ब्लॉक के सरसेना गांव में प्रधानमंत्री की 'अमृत सरोवर योजना' के तहत निर्मित सरोवर की स्थिति दयनीय है। जल संरक्षण और गांव के सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से इस परियोजना पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दर्शाती है। लाखों के खर्च के बावजूद सरोवर की बदहाली विकास कार्यों में लापरवाही और धन के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
इस योजना का लक्ष्य तालाब का जीर्णोद्धार कर उसे एक सुंदर स्थल और जल संरक्षण का केंद्र बनाना था। हालांकि, मौके पर काम अधूरा पड़ा है और सरोवर की दुर्दशा बनी हुई है। ग्रामीणों ने इस स्थिति के लिए स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, लाखों रुपये का बजट जारी होने के बावजूद अमृत सरोवर का काम अधूरा है और इसकी वर्तमान स्थिति खराब है। ग्राम प्रधान की जवाबदेही और कार्यक्षमता पर भी प्रश्नचिह्न लगे हैं। यह भी आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधि पुराने और अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के बजाय केवल नए कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
इस मामले पर प्रशासनिक पक्ष जानने के लिए खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) रमाकांत से संपर्क किया गया। उन्होंने इस विषय पर बयान देने के लिए खुद को अधिकृत नहीं बताया और अपनी कुर्सी छोड़कर कमरे से बाहर चले गए। प्रशासनिक अधिकारी का यह रुख कई सवाल खड़े करता है।
इस स्थिति और अधिकारियों के रवैये के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या ग्राम प्रधान इस अधूरे काम की जिम्मेदारी लेकर इसे पूरा करवाएंगे। सरसेना की जनता अब केवल आश्वासनों के बजाय धरातल पर ठोस कार्य देखना चाहती है।







