प्रशिक्षण, पंजीकरण, कानूनी पहचान और प्राथमिक उपचार की भूमिका देने समेत सात प्रमुख मांगें
बस्ती। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित बनाने की मांग को लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक वेलफेयर एसोसिएशन (उ.प्र.) ने प्रदेश सरकार के समक्ष विभिन्न मांगें रखी हैं। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम त्रिपाठी ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों के प्रशिक्षण, पंजीकरण और उनकी भूमिका को व्यवस्थित किए जाने से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपा।
एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य सेवक लंबे समय से लोगों को प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भूमिका निभा रहे हैं। संगठन के अनुसार, यदि इन स्वास्थ्य सेवकों को उनकी योग्यता और कार्यक्षमता के अनुरूप व्यवस्थित प्रशिक्षण, पंजीकरण तथा आवश्यक सरकारी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकता है।
ज्ञापन में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को “झोलाछाप डॉक्टर” कहकर अपमानित न करने तथा उन्हें प्रशिक्षित स्वास्थ्य सेवक के रूप में उचित पहचान और दर्जा देने की मांग की गई है। साथ ही प्राथमिक उपचार की भूमिका निर्धारित कर उन्हें रेफरल सेंटर व्यवस्था से जोड़ने का अनुरोध किया गया।
एसोसिएशन ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को समय-समय पर योग्यता के अनुरूप प्रशिक्षण देने, टीबी उन्मूलन, इंद्रधनुष जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय महामारियों में प्रशिक्षित स्वयंसेवक के रूप में कार्य करने का अवसर देने की मांग की है।
संगठन ने प्रधानमंत्री कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम की तर्ज पर स्वास्थ्य संबंधी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने तथा योग्यता के अनुसार रोजगार और रोजगारपरक अवसर मुहैया कराने की मांग भी रखी। इससे बिना उचित प्रशिक्षण के स्वास्थ्य सेवाओं में आने वाले लोगों को रोकने में मदद मिलने की बात कही गई।
इसके अलावा प्राथमिक उपचार से जुड़े कार्यों को लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों के विरुद्ध दर्ज मामलों की पुनः समीक्षा कर उचित मामलों में कार्रवाई या मुकदमों को वापस लेने पर विचार करने का अनुरोध किया गया।
डॉ. प्रेम त्रिपाठी ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध मानव संसाधन को प्रशिक्षण, पंजीकरण और उचित सरकारी व्यवस्था के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा प्रणाली से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता सीमित होने के कारण प्राथमिक स्तर पर काम करने वाले प्रशिक्षित स्वास्थ्य सेवकों की भूमिका को व्यवस्थित करने से सरकार, समाज और ग्रामीण जनता—तीनों को लाभ मिल सकता है।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से ज्ञापन में उल्लिखित मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए प्रशिक्षण, पंजीकरण और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।



