धनतेरस केवल धन-संपत्ति नहीं, आरोग्य और समृद्धि का भी पर्व : प्रो. डॉ. नवीन सिंह

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भगवान धन्वंतरि की उपासना से मिलता है स्वस्थ एवं निरोग जीवन का संदेश, आयुर्वेद और योग अपनाने पर दिया जोर


बस्ती। धनतेरस भारतीय सनातन संस्कृति का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व हमें धन-संपत्ति, सुख-समृद्धि के साथ-साथ स्वास्थ्य, आरोग्य और दीर्घायु का संदेश भी देता है। यह विचार वरिष्ठ आयुर्वेदिक एवं योग प्राकृतिक चिकित्सक प्रोफेसर डॉ. नवीन सिंह ने धनतेरस के धार्मिक, आध्यात्मिक एवं स्वास्थ्य संबंधी महत्व पर प्रकाश डालते हुए व्यक्त किए।


उन्होंने कहा कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस अथवा धनत्रयोदशी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। उनका प्राकट्य मानव जीवन में आरोग्य, निरोगता और दीर्घायु का प्रतीक है।


प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है— स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनम्। अर्थात स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोगों का शमन करना। वर्तमान समय में अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता के कारण अनेक बीमारियां बढ़ रही हैं। ऐसे में योग, प्राणायाम, ध्यान, प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर और संतुलित आहार को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।


उन्होंने बताया कि धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन एवं उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी शुभ मानी जाती है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा तथा संध्या में यमदीप जलाने की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है।


उन्होंने कहा कि वास्तविक धन केवल भौतिक संपत्ति नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, प्रसन्न मन और सकारात्मक विचार हैं। भगवान धन्वंतरि के आदर्शों को अपनाकर हमें स्वस्थ परिवार और निरोगी समाज के निर्माण का संकल्प लेना चाहिए।

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