Mau News: शहीद ब्रिगेडियर उस्मान की 78वीं पुण्यतिथि 3 जुलाई को

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नौशेरा के शेर के ख़िताब से नवाजे गए अमर शहीद ब्रिगेडियर उस्मान की 78 वीं पुण्यतिथि 'शहादत दिवस' के रूप में मनाई जाएगी। 3 जुलाई शुक्रवार को उनके पैतृक आवास मधुबन के बीबीपुर में दोपहर दो बजे से एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जायेगा। कार्यक्रम के संयोजक सुहैल अहमद ने बताया कि पूरा कार्यक्रम ब्रिगेडियर उस्मान के पैतृक हवेली जो कि 'कोतवाली' के नाम से प्रसिद्ध है, उसी में होगा। कार्यक्रम में गाज़ीपुर से सांसद अफजाल अंसारी, आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव, घोसी सांसद राजीव राय, बलिया सांसद सनातन पाण्डेय, लालगंज सांसद दरोगा प्रसाद सरोज एवं सलेमपुर सांसद रामशंकर विद्यार्थी सहित राजनीती एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे। उन्होंने क्षेत्रीय जनता से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में उपस्थित होकर अपनी मिट्टी के इस जाँबाज सपूत को श्रद्धांजलि देने और उनकी शहादत दिवस को यादगार बनाने की अपील की। 


ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान भारतीय सेना के एक अत्यंत जांबाज और बहादुर अफसर थे। 1947-48 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, उन्होंने पाकिस्तान को भारी शिकस्त दी थी और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। 


1948 में पाकिस्तानी सेना और कबायलियों ने नौशेरा पर कब्जा कर लिया था। ब्रिगेडियर उस्मान ने अपनी असाधारण रणनीतिक सूझबूझ से दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए और नौशेरा को पाकिस्तानी सेना से मुक्त कराया था। उनकी इसी जीत के बाद से उन्हें 'नौशेरा का शेर' पुकारा जाने लगा। 


पाकिस्तान ने उन्हें अपनी सेना का प्रमुख (आर्मी चीफ) बनाने का लालच दिया था। लेकिन ब्रिगेडियर उस्मान ने सभी प्रलोभनों को ठुकराते हुए अपनी मातृभूमि भारत को चूना। 


3 जुलाई 1948 को दुश्मन का एक तोप का गोला उनकी कमांड पोस्ट के पास आकर गिरा। गोलाबारी के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, उन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। वह युद्ध में शहीद होने वाले भारतीय सेना के सबसे वरिष्ठ अधिकारी थे। 


उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत देश के दूसरे सबसे बड़े वीरता पुरस्कार 'महावीर चक्र' (Maha Vir Chakra) से सम्मानित किया गया।

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