मऊ
के रानीपुर ब्लॉक स्थित तहरीरपुर गांव में लाखों रुपये की लागत से बना आरआरसी (RRC) केंद्र निष्क्रिय पड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस केंद्र से उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा है, वहीं कूड़ा ढोने के लिए मिले सरकारी वाहन का उपयोग निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है।
सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और कूड़ा प्रबंधन के लिए चलाई जा रही योजनाएं इस केंद्र की बदहाली के कारण प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार, केंद्र का निर्माण गांव के कूड़े के सही निस्तारण और स्वच्छता बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन यह निर्माण के बाद से कभी सक्रिय नहीं हुआ और अब पूरी तरह बदहाल है।
इस मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा में कूड़ा ढोने के लिए उपलब्ध कराई गई सरकारी गाड़ी (ई-रिक्शा या ट्रॉली) का उपयोग सार्वजनिक हित में नहीं हो रहा है।
आरोप है कि ग्राम प्रधान द्वारा इस वाहन का उपयोग अपने निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है। जिस वाहन को गलियों की सफाई और कूड़ा संग्रहण के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए था, वह प्रधान के व्यक्तिगत कामों में लगा रहता है, जिससे स्वच्छता अभियान बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
इस अव्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार की शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बाद विभाग में हलचल मच गई है। रानीपुर के सहायक विकास अधिकारी (ADO) विजय शंकर सिंह ने बताया कि उन्हें तहरीरपुर ग्राम सभा में आरआरसी केंद्र की बदहाली और संसाधनों के दुरुपयोग की जानकारी मिली है।
विजय शंकर सिंह ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
