माफिया को 'शहीद' बता कर 'शहीदों' का अपमान किया है सांसद Afzal Ansari ने - अशोक सिंह (भाजपा नेता)

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मऊ बीते दिन माफिया मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सपा सांसद अफजाल अंसारी एक कार्यक्रम के दौरान मुख्तार अंसारी को शहीद बता दिया, जिस पर उनके बीजेपी नेता और प्रबल प्रतिद्वंद्वी अशोक सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि कैसा शहीद? उसे शहीद कहना शहीदों का अपमान है।



किसी अपराधी को किसी माफिया को 'शहीद' बताकर 'शहीदों' का अपमान किया है — मुख्तार ने किया क्या है?

 ब्रिगेडियर उस्मान देश के लिए शहीद हुए और उनका अगर कार्यक्रम है उनका शहीदी दिवस मनाया जा रहा है। बलिदान दिवस मनाया जा रहा है, लोगों को जाना ही चाहिए। यह तो अच्छी बात है। लोग गए थे।


 हो सकता है वही जानते हो कि उनका कौन सा रिश्ता उनसे पड़ता है? हमने पहले भी बताया था कि जो लोग बताते हैं कि ब्रिगेडियर उस्मान हमारे नाना थे तो देश हित के लिए देश सेवा के लिए उन्होंने अपनी शादी ही नहीं की थी। उनके नाना कैसे हुए? आप बताएं। पता कर लीजिएगा। बगल बीबीपुर के रहने वाले हैं घोसी के, कि उन्होंने शादी की थी कि नहीं? बच्चे थे कि नहीं उनके?


सही है। पांच बार विधायक रहे तो देवता कौन होता है? जो कोई काम करता है लोगों के दिलों में कौन बसता है? लोगों के दिलों में किसका सम्मान बंटता है? जब आप जनता के लिए काम करेंगे, लोगों के लिए काम करेंगे तभी तो कि कह देने से देवता हो जाएंगे। 5 बार में मुख्तार ने किया क्या है? बता दें। अगर वह बता रहे हैं तो भी तो गिना दें कि उन्होंने यह काम किया मऊ विधानसभा के लिए मऊ सदर विधानसभा के लिए तो उन्होंने किया क्या है किनहीं-किन्ही गांव में केवल गेट बनाना छोड़कर गांव के गेट हैं जो बनाए उसमें केवल उनका बोर्ड लगा हुआ है। बता दें कोई बड़ा काम कोई छोटा काम मुख्तार द्वारा किया गया हो।


 गोल्ड मेडलिस्ट थे और गोल्ड मेडल लाए होते, तो किन सरकार ने फंसा दिया? वह तो उन्हीं सरकारों में उनको जो है जो सर्टिफिकेट अपना दिखाते हैं केंद्र में उन्हीं की सरकार थी ना। तो साजिश वाली सरकारों में थे और साजिश हो गई होगी। क्यों माने? हमको तो पता भी नहीं है कि गोल्ड मेडलिस्ट है कि नहीं है। उनका सर्टिफिकेट कैसा है? अब तो जो लोग जांच करते होंगे तो पता लगता होगा। तमोशी के दम पर उन्होंने विदेश से तमाम अपने पिता के कहने पर असलहे लाए और उनके यहां जब रोहणी में छापा पड़ा था उनके फ्लैट में दिल्ली में तो असलहे मिले अवैध कारतूसें मिली मात्रा से ज्यादा कारतूसे मिली और उन पर कारवाई हुई एसटीएफ ने कारवाई की इसीलिए शूटर बनाए गए थे। आप समझ लीजिए कौन सा सर्टिफिकेट था।


किस वजह से हुए थे 16 - 17 साल से जेल में थे तो कोर्ट भी तो पड़ी हुई है अगर अगर वो बेगुनाह रहते तो कोर्ट उनको छोड़ नहीं देती? इतना अपराध उन्होंने किया था इस नाते जेल में रहे ना। पुलिस काम है जेल भेज देना। पकड़ के भेज देंगे ना। शासन सत्ता का काम है। मान लीजिए शासन सत्ता उनसे नाराज है। 


उन्होंने जेल भेज दिया और 17 साल से तो बीजेपी की गवर्नमेंट ही नहीं। बीजेपी की गवर्नमेंट तो 2017 में बनी है ना। 9 साल ही ना हुआ। तो अगर आठ साल इसके पहले जेल में रहे तो किन कारणों से रहे? अपराधी नहीं रहते, माफिया नहीं रहते तो जेल में क्यों जाते? तार रहते तो अलग होता तो क्या दिखाना चाहते हैं कि वह दबंग थे बाहुबली थे अपराधी थे उनसे सब लोग डरते थे और एक तरफ बता बताएंगे कि वह जनता के लिए देवता थे तो एक ही चीज बतावे ना कि या तो देवता बतावे नहीं तो बताएं कि हमारा भाई अपराधी था, उससे लोग डरते थे उसकी दहशत थी। दोनों में एक बात बतानी चाहिए ना।


 उन्होंने तो यह भी कहा कि मुख्तार शहीद थे या शहीदों का अपमान नहीं है। अगर मुख्तार शहीद थे तो चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह राजगुरु अशफाकुल्लाह ब्रिगेडियर उस्मान हमीद अब्दुल हमीद वीर अब्दुल हमीद ये लोग क्या थे ये अपमान नहीं है शहीदों का उन्होंने तो सीधे-सीधे शहीदों को अपमान किया किसी अपराधी को किसी माफिया को शहीद बताकर शहीदों का अपमान किया है।

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